जब रफी और लता ने गाया छत्तीसगढ़ के लिए, बॉलीवुड के सुरों से सजा क्षेत्रीय सिनेमा का सफर

छत्तीसगढ़ी सिनेमा का बॉलीवुड से गहरा नाता रहा है। मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर जैसे महान गायकों ने छत्तीसगढ़ी फिल्मों में अपनी आवाज दी। वहीं सोनू निगम, उदित नारायण समेत कई दिग्गज सिंगर्स भी छत्तीसगढ़ी गीतों को अपनी आवाज दे चुके हैं।

Jun 20, 2026 - 18:34
 0  3
जब रफी और लता ने गाया छत्तीसगढ़ के लिए, बॉलीवुड के सुरों से सजा क्षेत्रीय सिनेमा का सफर

रायपुर। छत्तीसगढ़ी सिनेमा का इतिहास सिर्फ फिल्मों और कलाकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका जुड़ाव बॉलीवुड के कई दिग्गज गायकों से भी रहा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर ने भी छत्तीसगढ़ी फिल्मों के लिए अपनी आवाज दी थी। यही नहीं, बाद के वर्षों में सोनू निगम, उदित नारायण, कुमार सानू, शान और अलका याज्ञनिक जैसे कई प्रसिद्ध गायक भी छत्तीसगढ़ी गीतों का हिस्सा बने।

छत्तीसगढ़ की पहली फिल्म ‘कही देबे सन्देस’ से ही बॉलीवुड और क्षेत्रीय सिनेमा का यह रिश्ता शुरू हो गया था। वर्ष 1965 में रिलीज हुई इस ऐतिहासिक फिल्म में महान गायक मोहम्मद रफी ने दो गीत गाए थे। इन गीतों के बोल डॉ. हनुमंत नायडू ने लिखे थे। उस दौर में किसी क्षेत्रीय फिल्म के लिए रफी साहब का गाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी गई थी।

इसके कई दशक बाद भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने भी छत्तीसगढ़ी सिनेमा से अपना जुड़ाव जोड़ा। वर्ष 2005 में रिलीज हुई फिल्म ‘भकला’ के लिए उन्होंने संगीतकार कल्याण सेन के निर्देशन में एक मधुर छत्तीसगढ़ी गीत रिकॉर्ड किया। लता जी की आवाज ने इस फिल्म को विशेष पहचान दिलाई और छत्तीसगढ़ी संगीत को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।

समय के साथ छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री का दायरा बढ़ता गया और बॉलीवुड के कई नामचीन गायकों ने यहां के गीतों को अपनी आवाज दी। सोनू निगम, उदित नारायण, कुमार सानू, अलका याज्ञनिक, शान, साधना सरगम और विनोद राठौर जैसे लोकप्रिय कलाकारों ने विभिन्न छत्तीसगढ़ी फिल्मों और एल्बमों में गाने गाकर स्थानीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दिया।

फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि इन दिग्गज गायकों की भागीदारी ने छत्तीसगढ़ी सिनेमा को व्यापक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इससे न केवल स्थानीय कलाकारों का मनोबल बढ़ा, बल्कि क्षेत्रीय संगीत और संस्कृति को देशभर के श्रोताओं तक पहुंचाने में भी मदद मिली।

आज छत्तीसगढ़ी फिल्म और संगीत उद्योग लगातार आगे बढ़ रहा है, लेकिन मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर जैसे महान कलाकारों का योगदान इसके इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय माना जाता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 1