छत्तीसगढ़ी सिनेमा का इतिहास भले ही बहुत बड़ा न हो, लेकिन इसकी यात्रा बेहद दिलचस्प रही है। 1965 में बनी Kahi Debe Sandesh से लेकर 2000 में आई Mor Chhainha Bhuinya तक, इंडस्ट्री ने कई उतार-चढ़ाव देखे। इस बीच Ghar Dwar जैसी फिल्मों ने इसे जिंदा बनाए रखने की कोशिश की। इन तीनों फिल्मों के जरिए छत्तीसगढ़ी सिनेमा के बदलते दौर को समझा जा सकता है।
सबसे पहले बात Kahi Debe Sandesh की करें तो यह छत्तीसगढ़ी भाषा की पहली फिल्म मानी जाती है। सीमित संसाधनों और तकनीकी कमियों के बावजूद इस फिल्म में स्थानीय संस्कृति, परंपरा और समाज की झलक देखने को मिली। यही वजह है कि इसे इंडस्ट्री की मजबूत नींव रखने वाली फिल्म कहा जाता है।
इसके बाद 1971 में आई Ghar Dwar ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाने की कोशिश की। यह फिल्म पारिवारिक और सामाजिक विषयों पर आधारित थी, लेकिन उस समय दर्शकों का रुझान और संसाधनों की कमी के चलते इसे बड़ी सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद छत्तीसगढ़ी सिनेमा लंबे समय तक ठहराव का शिकार हो गया।
करीब तीन दशकों के बाद 2000 में Mor Chhainha Bhuinya रिलीज हुई, जिसे अक्सर इंडस्ट्री की वापसी के रूप में देखा जाता है। फिल्म ने दर्शकों का ध्यान जरूर खींचा और इसके बाद कुछ हद तक फिल्म निर्माण फिर शुरू हुआ, लेकिन तकनीक और कंटेंट के स्तर पर यह अभी भी सीमित दायरे में ही नजर आई।
अगर तीनों फिल्मों की तुलना करें तो साफ दिखता है कि Kahi Debe Sandesh ने शुरुआत की, Ghar Dwar ने संघर्ष के दौर को दर्शाया और Mor Chhainha Bhuinya ने एक नई शुरुआत का संकेत दिया। हालांकि, इन तीनों के बीच का अंतर यह भी बताता है कि इंडस्ट्री को लगातार विकास के लिए मजबूत प्रयासों की जरूरत रही है।