छत्तीसगढ़ राज्य के 25 साल और फिल्म विकास निगम की सुस्ती: क्या छॉलीवुड को मिला सरकारी साथ?
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 साल पूरे होने पर जानिए छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम (CFC) की 2018 से अब तक की स्थिति और छॉलीवुड फिल्मों को शासन से मिले सहयोग की हकीकत।
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के इस ऐतिहासिक अवसर पर जहां राज्य की सांस्कृतिक और आर्थिक प्रगति की चर्चा हो रही है, वहीं प्रदेश के फिल्म उद्योग 'छॉलीवुड' (Chhollywood) के भविष्य को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। साल 2018 में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम (CFC) के गठन की घोषणा के साथ ही स्थानीय फिल्मकारों में एक नई उम्मीद जगी थी, लेकिन बीते सालों में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
साल 2018 में फिल्म विकास निगम का गठन प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने और स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया था। विडंबना यह रही कि गठन के बाद लंबे समय तक निगम में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां नहीं हो सकीं। प्रशासनिक सुस्ती के कारण निगम के पास न तो कोई स्पष्ट बजट था और न ही फिल्मों के प्रमोशन के लिए कोई ठोस कार्ययोजना। इससे फिल्मकारों को सब्सिडी, उपकरण और तकनीकी सहायता मिलने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
राज्य सरकार ने पिछले वर्षों में छत्तीसगढ़ी लोक कला, तीज-त्योहारों और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कई सराहनीय कदम उठाए हैं। हालांकि, फिल्म उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन से फिल्म उद्योग का विकास नहीं हो सकता। फिल्मों को एक उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस, वित्तीय सब्सिडी और आधुनिक स्टूडियो की आवश्यकता लंबे समय से बनी हुई है।
राज्य के 25वें वर्ष में प्रवेश करते ही फिल्म जगत के लिए कुछ सकारात्मक संकेत मिलने शुरू हुए हैं। हाल ही में नवा रायपुर में 'चित्रोत्पला फिल्म सिटी' के निर्माण की दिशा में काम शुरू हुआ है। इसे छत्तीसगढ़ के फिल्म इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। 2025 में फिल्म नीति में सुधार और निगम की सक्रियता को लेकर नई सरकार से फिल्मकारों को काफी उम्मीदें हैं।
छत्तीसगढ़ी फिल्मों ने अपनी सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों तक का सफर तय किया है। अब जब राज्य अपने रजत जयंती वर्ष में है, फिल्मकारों की मांग है कि फिल्म विकास निगम को केवल कागजों तक सीमित न रखकर उसे क्रियाशील बनाया जाए। यदि शासन स्तर पर ठोस सहयोग और वित्तीय सहायता दी जाती है, तो छॉलीवुड न केवल मनोरंजन का साधन बनेगा, बल्कि राज्य के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और राजस्व का जरिया भी बनेगा।
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