फर्जी सर्टिफिकेट से चयन! 2 साल बाद भी संस्कृति विभाग की भर्ती अधर में, ना नियुक्ति ना रद्द
छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग की भर्ती में फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र का मामला सामने आने के बाद 2 साल से नियुक्ति अटकी है। जानिए पूरा मामला और क्यों उठ रहे हैं बड़े सवाल।
छत्तीसगढ़ के संस्कृति विभाग में निकाली गई सेकेंड क्लास अफसरों की भर्ती अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। वर्ष 2023 में जिन पदों के लिए चयन प्रक्रिया पूरी की गई थी, उसके दो साल बाद भी न तो किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति मिली है और न ही पूरी भर्ती को रद्द किया गया है। इस देरी की वजह भर्ती प्रक्रिया में सामने आए फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्रों को बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग ने पुरातत्व अधिकारी, पुरालेखवेत्ता और संग्रहाध्यक्ष जैसे पदों के लिए चयन सूची जारी की थी। लेकिन दस्तावेज़ों की जांच के दौरान सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों ने ऐसे अनुभव प्रमाण-पत्र जमा किए, जिनका वास्तविक रिकॉर्ड से कोई मेल नहीं था। एक ही अभ्यर्थी ने एक ही समय में दो अलग-अलग जगहों पर काम करने का दावा किया, जबकि आरटीआई के माध्यम से पता चला कि उस अवधि में वहां उसकी पोस्टिंग ही नहीं थी।
इस मामले की शिकायत शासन स्तर तक पहुंची और जांच भी कराई गई। जांच रिपोर्ट में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बावजूद अभी तक न तो दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त किया गया है। इसके चलते चयनित उम्मीदवारों को जॉइनिंग नहीं मिल पा रही है और पूरी भर्ती अधर में अटकी हुई है।
लोक सेवा आयोग के नियमों के अनुसार, चयन सूची की वैधता सीमित समय तक होती है, लेकिन यहां दो साल बीतने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। इससे न सिर्फ योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो रहा है, बल्कि विभाग की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा है कि शिकायतों की जांच की जा रही है और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अब तक किसी पर कार्रवाई न होने से यह मामला और भी गंभीर होता जा रहा है।
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