री-रिलीज़ से मिल रहा न्याय: वक्त से आगे की फिल्मों को आखिरकार मिल रहा हक

Sanam Teri Kasam और Tumbbad जैसी फिल्मों ने साबित किया कि री-रिलीज़ अच्छी और प्रासंगिक फिल्मों को न्याय दिलाने का बेहतरीन तरीका है।

Jan 30, 2026 - 17:56
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री-रिलीज़ से मिल रहा न्याय: वक्त से आगे की फिल्मों को आखिरकार मिल रहा हक

बॉलीवुड में री-रिलीज़ का चलन अब सिर्फ नॉस्टैल्जिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उन अच्छी फिल्मों को न्याय दिलाने का मजबूत माध्यम बनता जा रहा है, जो अपनी रिलीज़ के समय नजरअंदाज कर दी गई थीं। कई ऐसी फिल्में हैं जो आज भी प्रासंगिक हैं, दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ती हैं और पूरी तरह मनोरंजन करने की क्षमता रखती हैं।

अक्सर देखा गया है कि कुछ फिल्में अपने समय से आगे होती हैं। उनकी कहानी, ट्रीटमेंट या जॉनर उस दौर के दर्शकों से मेल नहीं खा पाती, लेकिन सालों बाद वही फिल्में नई पीढ़ी को ज्यादा समझ में आती हैं। ऐसे में री-रिलीज़ उन फिल्मों के लिए दूसरा मौका बन जाती है।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण “Sanam Teri Kasam” है। रिलीज़ के समय यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा सकी, लेकिन समय के साथ OTT और सोशल मीडिया के जरिए इसकी लोकप्रियता जबरदस्त बढ़ी। फिल्म के गाने, इमोशनल कहानी और कलाकारों की परफॉर्मेंस ने इसे एक कल्ट रोमांटिक फिल्म बना दिया। दोबारा रिलीज़ होने पर दर्शकों का रिस्पॉन्स यह साबित करता है कि फिल्म आज भी उतनी ही असरदार है।

इसी तरह “Tumbbad” भी एक ऐसी फिल्म है, जिसे शुरुआती दौर में सीमित दर्शक मिले। लेकिन बाद में OTT प्लेटफॉर्म पर इस फिल्म ने अलग ही पहचान बना ली। इसकी कहानी, सिनेमैटोग्राफी और लोककथा पर आधारित हॉरर ट्रीटमेंट को आज भारतीय सिनेमा की सबसे अनोखी उपलब्धियों में गिना जाता है। री-रिलीज़ के बाद यह साफ हो गया कि यह फिल्म बड़े पर्दे पर देखे जाने के लिए ही बनी थी।

री-रिलीज़ का एक बड़ा फायदा यह भी है कि नई पीढ़ी, जो इन फिल्मों को थिएटर में नहीं देख पाई थी, उन्हें बड़े पर्दे पर अनुभव कर पाती है। साथ ही, फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को भी उनके काम की वह सराहना मिलती है, जो पहले नहीं मिल सकी थी।

फिल्म इंडस्ट्री में यह ट्रेंड यह साबित कर रहा है कि बॉक्स ऑफिस का शुरुआती फैसला किसी फिल्म की गुणवत्ता तय नहीं करता। सही समय, सही दर्शक और दोबारा मौका मिलते ही अच्छी फिल्में अपनी असली ताकत दिखा देती हैं। आने वाले समय में कई और ऐसी फिल्मों की री-रिलीज़ दर्शकों को देखने को मिल सकती है, जो कभी अनदेखी रह गई थीं, लेकिन आज भी पूरी तरह प्रासंगिक और मनोरंजक हैं।

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