छत्तीसगढ़ की सबसे प्रतिष्ठित फिल्म 'मोर छइँहा भुइँया': सिनेमाघरों में बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड
छत्तीसगढ़ी सिनेमा (Chhollywood) की 'मोर छइँहा भुइँया' ने सिनेमाघरों में 27 हफ़्तों तक चलकर इतिहास रचा। जानिए इस प्रतिष्ठित फिल्म के रिकॉर्ड और छत्तीसगढ़ी सिनेमा का सफर।
छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग, जिसे प्यार से (Chhollywood) कहा जाता है, के इतिहास में कई फिल्में आईं और गईं, लेकिन एक फिल्म ऐसी है जिसने सफलता की नई परिभाषा लिखी। साल 2000 में रिलीज हुई फिल्म "मोर छइँहा भुइँया" न केवल एक ब्लॉकबस्टर साबित हुई, बल्कि यह छत्तीसगढ़ी संस्कृति और अस्मिता का प्रतीक बन गई।
सतीश जैन के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने रायपुर के मनोहर टॉकीज में लगातार 27 हफ़्तों (लगभग 189 दिन) तक सिल्वर जुबली मनाई, जो आज भी एक मिसाल है। ग्रामीण क्षेत्रों से लोग बैलगाड़ियों और ट्रैक्टरों में भरकर इस फिल्म को देखने शहरों के सिनेमाघरों तक पहुँचते थे।
- समय का संयोग: फिल्म की रिलीज के ठीक तीन दिन बाद ही छत्तीसगढ़ को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता मिली थी, जिससे दर्शकों में एक अलग ही भावनात्मक जुड़ाव पैदा हो गया।
- कम बजट, बड़ी कमाई: लगभग 20 लाख रुपये के सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने उस दौर में 2 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर सबको चौंका दिया था।
- बॉलीवुड को दी टक्कर: छत्तीसगढ़ के सिनेमाघरों में इस फिल्म ने उस समय की बड़ी बॉलीवुड फिल्मों जैसे 'मोहब्बतें' और 'मिशन कश्मीर' के बिजनेस को भी पीछे छोड़ दिया था।
सिनेमा के बदलते दौर में साल 2019 में आई "हँस झन पगली फंस जाबे" ने भी जबरदस्त सफलता हासिल की और "मया 2" जैसी फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़े। वहीं, 2024 और 2025 में 'मोर छइँहा भुइँया' के सीक्वल (पार्ट 2 और पार्ट 3) ने भी दर्शकों के बीच अपनी विरासत को बरकरार रखा है।
छत्तीसगढ़ी सिनेमा की पहली फिल्म 'कही देबे संदेस' (1965) ने जहाँ नींव रखी थी, वहीं 'मोर छइँहा भुइँया' ने इस इंडस्ट्री को एक मजबूत पहचान दिलाई। आज भी जब सबसे सफल और प्रतिष्ठित फिल्म की बात आती है, तो 'मोर छइँहा भुइँया' का नाम सबसे ऊपर रहता है।
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