रायपुर: छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग, जिसे प्यार से 'छॉलीवुड' कहा जाता है, वर्तमान में एक गंभीर दौर से गुजर रहा है। साल 2025 में रिलीज हुई अधिकांश फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे केवल एक कारण नहीं, बल्कि तीन प्रमुख तकनीकी और रचनात्मक बाधाएं हैं।
सबसे बड़ी चुनौती 'होल्डओवर अमाउंट' की है। स्थानीय थिएटरों के साथ हुए करार के मुताबिक, यदि कोई फिल्म एक सप्ताह में निर्धारित न्यूनतम कमाई (जैसे ₹2 लाख) नहीं कर पाती, तो वितरक उसे तुरंत हटा देते हैं। पर्याप्त प्रचार और शुरुआती दर्शकों की कमी के कारण कई फिल्में इस आंकड़े तक नहीं पहुँच पा रही हैं।
दूसरा महत्वपूर्ण कारण विषय वस्तु (कंटेंट) में मौलिकता की कमी है। आज का दर्शक वैश्विक स्तर का सिनेमा देख रहा है, ऐसे में पुरानी घिसी-पिटी कहानियों का दोहराव उन्हें सिनेमाघरों तक लाने में विफल साबित हो रहा है। इसके साथ ही, बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों के मुकाबले कमजोर तकनीकी गुणवत्ता और सीमित बजट भी एक बड़ी बाधा है। दर्शकों को अब स्क्रीन पर बेहतर सिनेमैटोग्राफी और उच्च स्तरीय विजुअल्स की तलाश है, जो स्थानीय फिल्मों में अक्सर नदारद रहते हैं। वर्तमान रुझान बताते हैं कि पिछले 1-2 वर्षों में रिलीज हुई लगभग 60-70% फिल्में व्यावसायिक रूप से असफल रही हैं।