जहाँ कभी गोलियाँ चलती थीं वहाँ कैमरा चला, जहाँ पुलिस का एक्शन होता था वहाँ कैमरे ने रचा इतिहास
अबूझमाड़ में पहली बार छत्तीसगढ़ी फिल्म की शूटिंग, छॉलीवुड ने रचा इतिहास। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सिनेमा, रोजगार और बदलाव की नई कहानी।
छत्तीसगढ़ी सिनेमा ने इस सप्ताह एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए नक्सल प्रभावित रहे अबूझमाड़ क्षेत्र में फिल्म शूटिंग की शुरुआत की है। जिस इलाके को लंबे समय तक भय और असुरक्षा से जोड़ा जाता रहा, वहां अब छॉलीवुड की टीम कैमरे के साथ नजर आ रही है। यह पहल न केवल सिनेमा के लिए बल्कि क्षेत्र के सामाजिक बदलाव का भी बड़ा संकेत मानी जा रही है।
अबूझमाड़ की प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगल, पहाड़ और आदिवासी संस्कृति को फिल्म के माध्यम से बड़े पर्दे पर उतारने की कोशिश की जा रही है। फिल्म यूनिट को स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों का पूरा सहयोग मिल रहा है, जिससे शूटिंग कार्य सुचारू और सुरक्षित रूप से किया जा रहा है। यह पहली बार है जब इतने संवेदनशील क्षेत्र में छत्तीसगढ़ी फिल्म की शूटिंग हो रही है।
फिल्म से जुड़े निर्माताओं का कहना है कि अबूझमाड़ सिर्फ एक लोकेशन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान है। यहां की जीवनशैली, संस्कृति और संघर्ष को सिनेमा के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने का उद्देश्य रखा गया है। इस शूटिंग से स्थानीय युवाओं को काम मिला है और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस पहल को सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि फिल्म शूटिंग से अबूझमाड़ को लेकर बनी नकारात्मक छवि बदलने में मदद मिलेगी और यह इलाका धीरे-धीरे पर्यटन और कला का केंद्र बन सकता है। यह कदम शांति और विकास की दिशा में मजबूत संदेश देता है।
छॉलीवुड के लिए यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। आने वाले समय में अबूझमाड़ और बस्तर जैसे इलाकों में और भी फिल्मों व वेब प्रोजेक्ट्स की शूटिंग होने की संभावना है, जिससे छत्तीसगढ़ी सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।
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