नागपुर में छत्तीसगढ़ी फिल्मों का क्रेज क्यों है इतना ज्यादा? प्रवासी समाज है बड़ी वजह
नागपुर में बसे प्रवासी छत्तीसगढ़ी समुदाय की वजह से छत्तीसगढ़ी फिल्मों को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिलता है। जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी।
छत्तीसगढ़ी फिल्मों को नागपुर और आसपास के इलाकों में मिलने वाला जबरदस्त रिस्पॉन्स केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी सामाजिक और भावनात्मक वजह छिपी हुई है। नागपुर में बड़ी संख्या में बसे प्रवासी छत्तीसगढ़ी समुदाय ने इस क्षेत्र को छत्तीसगढ़ी सिनेमा का मजबूत बाजार बना दिया है।
रोजगार, व्यापार और शिक्षा के उद्देश्य से वर्षों पहले छत्तीसगढ़ से निकलकर नागपुर पहुंचे लोगों ने यहां स्थायी बसावट कर ली। भले ही वे भौगोलिक रूप से अपनी जन्मभूमि से दूर हों, लेकिन भाषा, संस्कृति और परंपराओं से उनका जुड़ाव आज भी उतना ही मजबूत है। यही जुड़ाव उन्हें छत्तीसगढ़ी फिल्मों की ओर खींच लाता है।
छत्तीसगढ़ी फिल्में इन लोगों के लिए सिर्फ सिनेमा नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी की याद होती हैं। फिल्म के संवाद, गीत, पारिवारिक कहानियां और लोक-संस्कृति उन्हें अपने गांव, परिवार और बचपन की ओर लौटा ले जाती हैं। यही कारण है कि नागपुर में रिलीज होने वाली छत्तीसगढ़ी फिल्मों को प्रवासी दर्शकों का भावनात्मक समर्थन मिलता है।
प्रवासी छत्तीसगढ़ी समुदाय न सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित रहता है, बल्कि वे
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ग्रुप बुकिंग
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फैमिली शो
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सोशल मीडिया प्रमोशन
के जरिए फिल्मों को हिट कराने में भी भूमिका निभाते हैं। कई बार देखा गया है कि नागपुर में अच्छी ओपनिंग मिलने के बाद ही फिल्मों को अन्य क्षेत्रों में थिएटर मिल पाते हैं।
नागपुर में बसे छत्तीसगढ़ी समाज के लिए यह सिनेमा पहचान और गर्व का माध्यम बन चुका है। यही वजह है कि सीमित बजट और कम प्रचार के बावजूद छत्तीसगढ़ी फिल्में यहां लगातार बेहतर प्रदर्शन करती हैं। कहा जा सकता है कि नागपुर में छत्तीसगढ़ी फिल्मों का क्रेज, दरअसल वहां बसे छत्तीसगढ़ी समाज की संस्कृति से अटूट निष्ठा का परिणाम है।
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