छत्तीसगढ़ के तीन कलाकार जिन्होंने गरीबी से उठकर बनाई बड़ी पहचान
पढ़िए छत्तीसगढ़ के तीन ऐसे कलाकारों की प्रेरक कहानी, जिन्होंने बेहद गरीबी से उठकर अपनी प्रतिभा के दम पर कला जगत में खास स्थान हासिल किया। उनकी संघर्षगाथा आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है।
छत्तीसगढ़ की धरती प्रतिभा से भरी रही है, लेकिन कुछ कलाकार ऐसे भी हैं जिन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों से गुज़रते हुए अपनी मेहनत से वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना भी करना आसान नहीं था। आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और परिवारिक संघर्षों के बीच भी इन कलाकारों ने अपने सपनों को छोड़ने से इंकार किया और आज वे छत्तीसगढ़ी कला और संस्कृति के प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
इनमें सबसे पहले नाम आता है मनोज बघेल का। मजदूर परिवार में जन्मे मनोज के पास न तो संगीत सीखने का साधन था और न ही मंच तक पहुँचने का अवसर। गांव के छोटे समारोहों से शुरू हुई उनकी यह यात्रा आज छत्तीसगढ़ी संगीत उद्योग में एक मजबूत पहचान बन चुकी है। कई सुपरहिट गानों ने उन्हें आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया।
दूसरे कलाकार गोविंदराम निषाद की कहानी भी कम प्रेरक नहीं। बेहद गरीब किसान परिवार से आने वाले गोविंदराम खेतों में काम करते हुए गीत गुनगुनाते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि उन्हें संगीत के औपचारिक प्रशिक्षण का अवसर कभी नहीं मिला। इसके बावजूद उनकी सुरीली आवाज़ ने उन्हें छत्तीसगढ़ी लोकगायन का सम्मानित नाम बना दिया।
तीसरी कलाकार मीरा चौहान ने भी गरीबी के खिलाफ लंबा संघर्ष किया। घर की जिम्मेदारियाँ, आर्थिक संकट और पारिवारिक दबाव—इन सबके बावजूद मीरा ने अपने गायन को नहीं छोड़ा। समय के साथ वे प्रदेश की प्रमुख लोकगायिकाओं में शामिल हुईं, और आज वे नई पीढ़ी की महिला कलाकारों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
इन तीनों कलाकारों की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा को परिस्थितियाँ रोक नहीं सकतीं। छत्तीसगढ़ की उभरती युवा पीढ़ी इनके संघर्ष और सफलता की कहानी से न सिर्फ प्रेरणा ले रही है, बल्कि यह भी सीख रही है कि जुनून और मेहनत से हर कठिनाई को मात दी जा सकती है।
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