14 जुलाई ने छीने सिनेमा के दो अनमोल रत्न! एक ने अमर धुनें दीं, दूसरी बनीं बॉलीवुड की पहली ग्लैमरस स्टार-मां
14 जुलाई भारतीय सिनेमा के इतिहास का भावुक दिन माना जाता है। इसी दिन संगीत सम्राट मदन मोहन और दिग्गज अभिनेत्री लीला चिटनिस का निधन हुआ था। जानिए दोनों महान हस्तियों का बॉलीवुड में अतुलनीय योगदान।
मुंबई। भारतीय सिनेमा के इतिहास में 14 जुलाई एक बेहद भावुक तारीख मानी जाती है। इसी दिन बॉलीवुड ने दो ऐसी महान हस्तियों को हमेशा के लिए खो दिया, जिनका योगदान आज भी संगीत और अभिनय की दुनिया में अमर है। एक ओर अपनी मधुर धुनों से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले संगीतकार मदन मोहन, तो दूसरी ओर हिंदी सिनेमा की पहली आधुनिक अभिनेत्रियों में शुमार लीला चिटनिस ने इसी तारीख को दुनिया को अलविदा कहा।
गज़लों के बादशाह मदन मोहन को 14 जुलाई को खो दिया था बॉलीवुड ने
14 जुलाई 1975 को महान संगीतकार मदन मोहन कोहली का निधन हुआ। उन्हें हिंदी फिल्म संगीत का 'गज़लों का बादशाह' कहा जाता है। उनकी बनाई धुनों में ऐसी मिठास और भावनात्मक गहराई थी कि आज भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद बनी हुई हैं।
'लग जा गले', 'आपकी नज़रों ने समझा', 'नैना बरसे रिमझिम', 'वो चुप रहें तो' और 'तेरी आँखों के सिवा' जैसी कालजयी रचनाएं आज भी सदाबहार मानी जाती हैं।
उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निधन के लगभग तीन दशक बाद उनकी अप्रयुक्त धुनों को यश चोपड़ा ने फिल्म 'वीर-ज़ारा' (2004) में इस्तेमाल किया। यह एल्बम सुपरहिट रहा और नई पीढ़ी को भी मदन मोहन के संगीत से रूबरू कराया।
लीला चिटनिस: बॉलीवुड की पहली आधुनिक अभिनेत्रियों में एक
14 जुलाई 2003 को हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री लीला चिटनिस का निधन हुआ। अपने दौर में वह सबसे पढ़ी-लिखी और प्रगतिशील अभिनेत्रियों में गिनी जाती थीं। उन्होंने ऐसे समय में फिल्मों में कदम रखा था, जब महिलाओं का अभिनय करना समाज में सहज नहीं माना जाता था।
लीला चिटनिस को लक्स (Lux) साबुन के विज्ञापन का चेहरा बनने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री माना जाता है। इसके बाद कई पीढ़ियों की अभिनेत्रियां इस प्रतिष्ठित ब्रांड से जुड़ीं।
अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने मुख्य नायिका के रूप में कई सफल फिल्मों में काम किया। बाद के वर्षों में उन्होंने दिलीप कुमार, राज कपूर, देव आनंद और कई अन्य सुपरस्टार्स की मां के किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में अलग पहचान बनाई। इसी वजह से उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार 'मां' में भी गिना जाता है।
14 जुलाई क्यों है भारतीय सिनेमा के लिए खास?
14 जुलाई सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की दो अमूल्य विरासतों की याद दिलाने वाला दिन है। एक ने अपनी धुनों से प्रेम, दर्द और गज़लों को अमर बना दिया, जबकि दूसरी ने अभिनय के हर दौर में खुद को साबित करते हुए भारतीय फिल्मों में महिलाओं के लिए नई राह तैयार की।
आज भी जब 'लग जा गले' जैसी धुनें गूंजती हैं या पुरानी क्लासिक फिल्मों में लीला चिटनिस का अभिनय दिखाई देता है, तो यह एहसास होता है कि महान कलाकार कभी विदा नहीं होते, वे अपनी कला के जरिए हमेशा जीवित रहते हैं।
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