छत्तीसगढ़ी सिनेमा की फिल्म ‘मंदराजी’ के नायक कौन? जानिए दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की गाथा
छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘मंदराजी’ किस पर आधारित है? जानिए नाचा के पितामह दाऊ दुलार सिंह मंदराजी का जीवन, योगदान और उनकी बायोपिक से जुड़ी पूरी जानकारी।
छत्तीसगढ़ी सिनेमा की चर्चित फिल्म ‘मंदराजी’ उन महान लोकनाचा पुरोधा दाऊ दुलार सिंह मंदराजी के जीवन पर आधारित है, जिन्हें पूरे प्रदेश में नाचा का पितामह कहा जाता है। उनका असली नाम दुलार सिंह था और वे रायगढ़ क्षेत्र के मूल निवासी थे।
नाचा को विश्वपटल पर पहचान दिलाई
दाऊ मंदराजी ने 1927–28 में रवेली नाचा पार्टी की स्थापना करके बिखरे हुए नाचा कलाकारों को एक मंच पर जोड़ा। उन्होंने नाचा को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का माध्यम बनाया। उनके प्रदर्शन छुआछूत, अमीरी-गरीबी, नशामुक्ति और ग्रामीण समस्याओं पर आधारित रहते थे।
जन्म और मृत्यु
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जन्म: 1 अप्रैल 1911
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मृत्यु: 24 सितंबर 1984
दाऊ मंदराजी के जीवन और नाचा पर उनके प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘दाऊ मंदराजी सम्मान’ स्थापित किया है।
नाचा की परंपरा को पुनर्जीवित करने वाला नाम
दाऊ मंदराजी ने नाचा की पारंपरिक शैली में सुधार करते हुए उसमें कथा-वाचन, सामाजिक व्यंग्य, संगीत और अभिनय को नए रूप में पेश किया। वे ग्रामीण कला को मंच, पहचान और सम्मान दिलाने वाले अग्रणी व्यक्तियों में गिने जाते हैं।
बनी बायोपिक फिल्म: ‘मंदराजी’
छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘Mandraji – Once Upon a Time in Chhattisgarh’ नाचा के इस महान कलाकार के जीवन, संघर्षों और उपलब्धियों पर आधारित है। फिल्म में दिखाया गया है कि एक साधारण ग्रामीण कलाकार ने किस तरह पूरे प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा को नई पहचान दी।
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