किसी को कहा गया 'मनहूस', किसी का उड़ाया गया वजन का मजाक... आज वही अभिनेत्रियां नेशनल अवॉर्ड जीतकर बनीं इंडस्ट्री की सबसे बड़ी स्टार्स

विद्या बालन, कंगना रनौत, कीर्ति सुरेश और तब्बू जैसी अभिनेत्रियों ने करियर की शुरुआत में रिजेक्शन, बॉडी शेमिंग और ट्रोलिंग का सामना किया। लेकिन अपने अभिनय के दम पर इन्होंने नेशनल अवॉर्ड जीतकर आलोचकों को करारा जवाब दिया।

Aug 7, 2026 - 18:58
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किसी को कहा गया 'मनहूस', किसी का उड़ाया गया वजन का मजाक... आज वही अभिनेत्रियां नेशनल अवॉर्ड जीतकर बनीं इंडस्ट्री की सबसे बड़ी स्टार्स

मुंबई। बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री में सफलता का सफर कभी आसान नहीं रहा। कई ऐसी दिग्गज अभिनेत्रियां हैं जिन्हें करियर की शुरुआत में बॉडी शेमिंग, रिजेक्शन, ट्रोलिंग, भाषा, लुक्स और बैकग्राउंड को लेकर ताने सुनने पड़े। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने अभिनय को हथियार बनाया और आज राष्ट्रीय पुरस्कार (National Award) जीतकर भारतीय सिनेमा की सबसे सम्मानित कलाकारों में शुमार हैं।

विद्या बालन: 'मनहूस' कहकर फिल्मों से निकाला गया, फिर बनीं दमदार महिला-केंद्रित सिनेमा की पहचान

विद्या बालन के करियर की शुरुआत संघर्षों से भरी रही। साउथ फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने कई फिल्मों के लिए साइन किया, लेकिन एक के बाद एक प्रोजेक्ट या तो बंद हो गए या उन्हें फिल्मों से बाहर कर दिया गया। इसी वजह से उन्हें 'मनहूस' (Jinxed) तक कहा जाने लगा।

बॉलीवुड में आने के बाद भी उनका संघर्ष खत्म नहीं हुआ। उनके वजन, बॉडी टाइप और ड्रेसिंग सेंस को लेकर लंबे समय तक मीडिया और सोशल मीडिया पर उनका मजाक उड़ाया गया। कई लोगों ने उन्हें पारंपरिक बॉलीवुड हीरोइन के रूप में स्वीकार करने से इनकार किया।

लेकिन विद्या ने किसी आलोचना का जवाब शब्दों से नहीं, बल्कि अपने अभिनय से दिया। 'परिणीता', 'पा', 'इश्किया', 'कहानी', 'तुम्हारी सुलु' और खास तौर पर 'द डर्टी पिक्चर' जैसी फिल्मों ने उन्हें भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन अभिनेत्रियों की कतार में ला खड़ा किया। 'द डर्टी पिक्चर' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।

कंगना रनौत: अंग्रेजी, लुक्स और 'आउटसाइडर' टैग से लेकर चार नेशनल अवॉर्ड तक

हिमाचल प्रदेश के छोटे शहर से मुंबई पहुंचीं कंगना रनौत को शुरुआत में कई तरह के तानों का सामना करना पड़ा। उनकी अंग्रेजी बोलने के तरीके, घुंघराले बाल, फैशन सेंस और इंडस्ट्री में किसी फिल्मी परिवार से संबंध न होने के कारण उन्हें अक्सर कमतर आंका गया।

कई मौकों पर उन्हें 'आउटसाइडर' होने की वजह से भी संघर्ष करना पड़ा। लेकिन उन्होंने लगातार अलग-अलग तरह के चुनौतीपूर्ण किरदार निभाकर अपनी अलग पहचान बनाई।

'फैशन', 'क्वीन', 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स', 'मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी' और 'पंगा' जैसी फिल्मों ने उन्हें अभिनय की शीर्ष श्रेणी में पहुंचा दिया। कंगना अब तक चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुकी हैं, जो उन्हें देश की सबसे सम्मानित अभिनेत्रियों में शामिल करता है।

कीर्ति सुरेश: वजन घटाने पर ट्रोल हुईं, फिर 'महानटी' से रच दिया इतिहास

साउथ सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री कीर्ति सुरेश को भी सोशल मीडिया ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। जब उन्होंने अपने स्वास्थ्य और फिटनेस पर काम करते हुए काफी वजन कम किया, तब कई लोगों ने दावा किया कि उन्होंने अपना पुराना आकर्षण खो दिया है।

करियर के शुरुआती दौर में उन्हें कमर्शियल फिल्मों में खुद को साबित करने के लिए भी काफी मेहनत करनी पड़ी, जहां अक्सर हीरोइनों से केवल ग्लैमर और डांस की उम्मीद की जाती थी।

लेकिन महान अभिनेत्री सावित्री की बायोपिक 'महानटी' में उनके शानदार अभिनय ने सबकी सोच बदल दी। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला और वह भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं।

तब्बू: ग्लैमर के दौर में भी अभिनय को बनाया सबसे बड़ी ताकत

तब्बू का सफर भी पारंपरिक बॉलीवुड हीरोइनों से अलग रहा। उन्हें कभी 'डांसिंग क्वीन' या सिर्फ ग्लैमरस अभिनेत्री के रूप में नहीं देखा गया। एक समय ऐसा भी था जब मसाला फिल्मों के दौर में उनके गंभीर किरदारों और अलग अभिनय शैली पर सवाल उठाए जाते थे।

लेकिन तब्बू ने कभी खुद को ट्रेंड के मुताबिक बदलने की कोशिश नहीं की। उन्होंने हमेशा कहानी और अभिनय को प्राथमिकता दी।

'माचिस', 'चांदनी बार', 'हैदर', 'अंधाधुन', 'दृश्यम' और 'भूल भुलैया 2' जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। 'माचिस' और 'चांदनी बार' के लिए उन्हें दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले और आज भी वे भारतीय सिनेमा की सबसे भरोसेमंद और बहुमुखी अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं।

संघर्ष से सफलता तक की मिसाल

इन चारों अभिनेत्रियों की कहानी बताती है कि आलोचना, रिजेक्शन और ट्रोलिंग किसी कलाकार की मंजिल तय नहीं करते। प्रतिभा, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर हर चुनौती को सफलता में बदला जा सकता है। आज विद्या बालन, कंगना रनौत, कीर्ति सुरेश और तब्बू नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

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