20 जुलाई ने भारतीय सिनेमा को दिए कई अनमोल सितारे! इसी दिन जन्मे थे 'जुबली कुमार', तो एक महान गायिका ने कहा था दुनिया को अलविदा

20 जुलाई भारतीय सिनेमा के इतिहास में बेहद खास दिन है। इसी दिन राजेंद्र कुमार, नसीरुद्दीन शाह और पी. भानुमती का जन्म हुआ, जबकि महान गायिका गीता दत्त की पुण्यतिथि भी 20 जुलाई को ही मनाई जाती है। जानिए इस तारीख से जुड़े ऐतिहासिक फिल्मी किस्से।

Jul 20, 2026 - 19:13
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20 जुलाई ने भारतीय सिनेमा को दिए कई अनमोल सितारे! इसी दिन जन्मे थे 'जुबली कुमार', तो एक महान गायिका ने कहा था दुनिया को अलविदा

मुंबई। भारतीय सिनेमा के इतिहास में 20 जुलाई सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि कई दिग्गज कलाकारों की यादों और उपलब्धियों से जुड़ा एक ऐतिहासिक दिन है। इसी दिन ऐसे कलाकारों का जन्म हुआ जिन्होंने अभिनय, संगीत और भारतीय फिल्म संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वहीं इसी तारीख को एक ऐसी महान गायिका ने दुनिया को अलविदा कहा, जिनकी आवाज आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा है।

'जुबली कुमार' राजेंद्र कुमार की जयंती

20 जुलाई 1927 को सियालकोट (अब पाकिस्तान) में जन्मे राजेंद्र कुमार हिंदी सिनेमा के पहले ऐसे सुपरस्टारों में गिने जाते हैं, जिन्हें दर्शकों ने 'जुबली कुमार' का नाम दिया।

1960 के दशक में उनकी फिल्मों का ऐसा जादू था कि लगातार कई फिल्में सिल्वर जुबली (25 सप्ताह) और गोल्डन जुबली (50 सप्ताह) मनाती थीं। यही वजह थी कि उन्हें यह ऐतिहासिक उपनाम मिला।

उन्होंने 'मदर इंडिया', 'संगम', 'आरज़ू', 'मेरे महबूब', 'सूरज' और 'झुक गया आसमान' जैसी कई यादगार फिल्मों में अभिनय किया। उनकी लोकप्रियता का दौर भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम अध्यायों में गिना जाता है।

अभिनय के उस्ताद नसीरुद्दीन शाह 

20 जुलाई 1950 को जन्मे नसीरुद्दीन शाह भारतीय समानांतर (Parallel) सिनेमा और रंगमंच के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में शामिल हैं।

जब मुख्यधारा का सिनेमा मसाला फिल्मों की ओर बढ़ रहा था, तब नसीरुद्दीन शाह ने 'आक्रोश', 'पार', 'मासूम', 'स्पर्श' और 'जाने भी दो यारो' जैसी फिल्मों से यथार्थवादी अभिनय की नई मिसाल पेश की।

उनका अभिनय आज भी फिल्म संस्थानों और थिएटर कलाकारों के लिए अध्ययन का विषय माना जाता है।

गीता दत्त की पुण्यतिथि

20 जुलाई 1972 को भारतीय सिनेमा ने अपनी सबसे मधुर आवाजों में से एक गीता दत्त को खो दिया।

उन्होंने 'प्यासा', 'कागज़ के फूल', 'सी.आई.डी.' और कई क्लासिक फिल्मों में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। 'बाबूजी धीरे चलना', 'वक्त ने किया क्या हसीं सितम', 'जाने क्या तूने कही' और 'मेरा सुंदर सपना बीत गया' जैसे गीत आज भी सदाबहार माने जाते हैं।

गीता दत्त की गायकी में दर्द, नज़ाकत और भावनाओं का ऐसा संगम था जिसने उन्हें भारतीय फिल्म संगीत की अमर गायिकाओं में शामिल कर दिया।

दक्षिण भारतीय सिनेमा की अग्रणी महिला पी. भानुमती

20 जुलाई 1925 को जन्मीं पी. भानुमती दक्षिण भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में गिनी जाती हैं।

वह सिर्फ एक सफल अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि निर्देशक, निर्माता, लेखिका, संगीतकार और पार्श्वगायिका भी थीं। उन्हें तेलुगु और तमिल सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टारों में गिना जाता है।

पुरुष प्रधान फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने महिलाओं के लिए नए रास्ते खोले और आने वाली पीढ़ियों की अभिनेत्रियों के लिए प्रेरणा बनीं।

भारतीय सिनेमा के लिए यादगार तारीख

20 जुलाई भारतीय मनोरंजन जगत के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इस एक दिन ने भारतीय सिनेमा को कई ऐसी महान हस्तियां दीं, जिनकी विरासत आज भी अभिनय, संगीत और फिल्म निर्माण की दुनिया को प्रेरित करती है। राजेंद्र कुमार की लोकप्रियता, नसीरुद्दीन शाह का बेजोड़ अभिनय, गीता दत्त की अमर आवाज और पी. भानुमती का बहुमुखी योगदान भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।

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