छत्तीसगढ़ गठन के 25 साल: क्या राष्ट्रीय स्तर पर मिली 'छालीवुड' को असली पहचान?
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने पर जानें छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री (Chhollywood) की उपलब्धियां, राष्ट्रीय पुरस्कार और भविष्य की चुनौतियां।
छत्तीसगढ़ी सिनेमा के लिए पिछला कुछ समय ऐतिहासिक रहा है। फिल्म 'भूलन द मेज' ने 67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में 'सर्वश्रेष्ठ छत्तीसगढ़ी फिल्म' का खिताब जीतकर राज्य का मान बढ़ाया। इसके अलावा, 2025 में छत्तीसगढ़ के ही दीपक किंगरानी को फिल्म 'सिर्फ एक बंदा काफी है' के लिए 'सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक' का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, जो यह दर्शाता है कि यहाँ की प्रतिभाएं अब बॉलीवुड और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा रही हैं।
राज्य गठन के शुरुआती वर्षों में साल भर में केवल 2 से 4 फिल्में बनती थीं, जो अब बढ़कर 40 से 50 फिल्में प्रति वर्ष तक पहुँच गई हैं। तकनीक और संगीत के मामले में भी काफी सुधार हुआ है। हालाँकि, आज भी कई फिल्में अपनी लागत निकालने के लिए संघर्ष करती हैं। मुख्य चुनौतियों में शामिल हैं:
- सिनेमाघरों की कमी: राज्य में फिल्मों के प्रदर्शन के लिए पर्याप्त स्क्रीन उपलब्ध नहीं हैं।
- वितरण प्रणाली: फिल्मों को ग्रामीण और छोटे कस्बों तक पहुँचाने के लिए एक मजबूत वितरण तंत्र का अभाव है।
- पारदर्शिता की मांग: फिल्म निर्माताओं द्वारा सब्सिडी और सरकारी प्रोत्साहन की नीतियों में अधिक पारदर्शिता की मांग लगातार की जा रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार की नई फिल्म नीति और नवा रायपुर में 'चित्रोत्पला फिल्म सिटी' जैसी बड़ी परियोजनाओं से फिल्मकारों को काफी उम्मीदें हैं। यदि सरकार सिनेमाघरों की संख्या बढ़ाने और ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर क्षेत्रीय फिल्मों को बढ़ावा देने में मदद करती है, तो छत्तीसगढ़ी सिनेमा आने वाले समय में राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर अपनी एक अलग पहचान बना सकता है।
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