‘छत्तीसगढ़ के भीम चिंताराम’ ने जीते दो पुरस्कार, 13 देशों में हो चुकी है फिल्म की चर्चा
दाऊ चिंताराम टिकरिहा के जीवन पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘छत्तीसगढ़ के भीम चिंताराम’ ने भिलाई इमैजिनेशन फिल्म इंटरनेशनल फेस्टिवल में दो पुरस्कार जीते हैं।
छत्तीसगढ़ के जननायक और समाजसेवी दाऊ चिंताराम टिकरिहा के जीवन और जनसेवा को पर्दे पर उतारने वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘छत्तीसगढ़ के भीम चिंताराम’ ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। भिलाई के होटल सेंट्रल पार्क में 16 अगस्त 2026 को आयोजित इमैजिनेशन फिल्म इंटरनेशनल फेस्टिवल के तीसरे संस्करण में फिल्म को दो महत्वपूर्ण पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
फिल्म ने ‘बेस्ट डॉक्यूमेंट्री – छत्तीसगढ़’ और ‘बेस्ट शॉर्ट फिल्म – छत्तीसगढ़’ का अवॉर्ड अपने नाम किया। फिल्म का निर्माण वज्र विजन स्टूडियो के बैनर तले हुआ है और इसका निर्देशन अंशु धुरंधर ने किया है।
📚 9 साल के शोध के बाद तैयार हुई फिल्म
‘छत्तीसगढ़ के भीम चिंताराम’ महज एक डॉक्यूमेंट्री नहीं, बल्कि दाऊ चिंताराम टिकरिहा के जीवन, संघर्ष और समाज के लिए किए गए कार्यों का दस्तावेज है। फिल्म को तैयार करने के पीछे करीब 9 वर्षों तक शोध और अध्ययन किया गया।
दाऊ चिंताराम टिकरिहा ने आम लोगों की सुविधाओं और विकास के लिए कई उल्लेखनीय कार्य किए थे। इनमें सड़क निर्माण, नहरों के मार्ग में बदलाव, पलायन रोकने और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने जैसे जनहित से जुड़े प्रयास शामिल रहे।
फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी कवि मीर अली मीर ने संभाली है, जिससे कहानी को भावनात्मक रूप से और प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है।
🌍 13 देशों में पहुंच चुकी है फिल्म
इस डॉक्यूमेंट्री की खास उपलब्धि यह भी रही कि इसे अब तक 13 देशों में चयन मिल चुका है। इसके अलावा देश और विदेश के विभिन्न फिल्म समारोहों में फिल्म का 40 से ज्यादा स्थानों पर चयन हो चुका है।
इस लगातार मिल रही सफलता ने ‘छत्तीसगढ़ के भीम चिंताराम’ को छत्तीसगढ़ की जमीनी कहानियों और यहां के जननायकों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल कर दिया है।
🎥 फेस्टिवल में 51 देशों से पहुंचीं 331 फिल्में
इमैजिनेशन फिल्म इंटरनेशनल फेस्टिवल के तीसरे संस्करण में इस बार 51 देशों से कुल 331 फिल्मों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं। इनमें से चयनित करीब 70 फिल्मों की दो हॉल में स्क्रीनिंग की गई।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहीं। वहीं तुलसी सोनी और कृपा शंकर शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
फेस्टिवल का आयोजन डायरेक्टर सुषमा चवरे, क्यूरेटर धीरज चवरे और टेक्निकल हेड सुमेध चवरे के नेतृत्व में हुआ। फिल्म फेस्टिवल से जुड़े निर्णायक मंडल में फिल्म जगत की कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल रहीं।
🏆 टीम ने पुरस्कारों को माना छत्तीसगढ़ की मिट्टी का सम्मान
फिल्म को मिले दोनों पुरस्कारों को पूरी टीम ने सिर्फ अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं माना, बल्कि इसे छत्तीसगढ़ की मिट्टी, यहां के जननायकों और अनकही जनसेवा की कहानियों को मिला सम्मान बताया।
‘छत्तीसगढ़ के भीम चिंताराम’ की लगातार बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहुंच यह दिखाती है कि स्थानीय और जमीनी कहानियां भी मजबूत प्रस्तुति के साथ देश-दुनिया के फिल्म मंचों पर अपनी पहचान बना सकती हैं।
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