राष्ट्रीय मंच पर चमके छत्तीसगढ़ के 9 कलाकार: पंथी, पंडवानी और लोककला को मिली नई पहचान
छत्तीसगढ़ के नौ प्रमुख कलाकार—तीजन बाई, डॉ. राधेश्याम बारले, अनुपमा मिश्रा, सुरजीत क्लाउड, गोविंदराम निषाद, मोर मुकुटधारी समूह, हेमलता और अनु असुर—जिन्होंने पंथी, पंडवानी और लोककला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। पढ़िए उनकी उपलब्धियों की पूरी कहानी।
छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और लोकपरंपरा को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने में कई कलाकारों ने ऐसा योगदान दिया है, जिसने पूरे देश में राज्य की पहचान को मजबूत किया है। अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इन कलाकारों ने न केवल छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया, बल्कि भारतीय कला जगत में भी एक विशिष्ट स्थान बनाया। उनकी प्रतिभा, साधना और निरंतर प्रयासों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और लोकप्रियता दिलाई है।
पंथी नृत्य की गरिमा को देशभर में फैलाने में पद्मश्री डॉ. राधेश्याम बारले की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। सतनाम पंथ की संस्कृति और गुरु घासीदास जी के उपदेशों को मंच पर उतारने की उनकी शैली ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनके प्रदर्शन न केवल भारत के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक समारोहों में सराहे गए, बल्कि विदेशों में भी उन्होंने छत्तीसगढ़ी संस्कृति का गौरव बढ़ाया।
इसी तरह, पंडवानी की जीवंत और शक्तिशाली परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय पद्मविभूषण तीजन बाई को जाता है। उन्होंने अपनी गायकी, अभिव्यक्ति और दमदार प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किए, जो उनके असाधारण योगदान की पुष्टि करते हैं।
पंडवानी और छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत के क्षेत्र में उभरते नामों में अनुपमा मिश्रा भी शामिल हैं। स्थानीय मंचों से शुरुआत करने वाली अनुपमा ने अपनी आवाज़ की अनोखी शैली और गहराई के कारण राष्ट्रीय समारोहों में पहचान बनाई। उनकी प्रस्तुति में परंपरा और आधुनिकता का संतुलन उन्हें देशभर के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाता है।
अभिनय और हास्य कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वालों में सुरजीत क्लाउड का नाम भी उल्लेखनीय है। छत्तीसगढ़ी कॉमेडी में अपनी विशिष्ट शैली के कारण वे राष्ट्रीय टीवी शोज़ और प्रमुख कॉमेडी कार्यक्रमों तक पहुँचे। उनकी सरल अभिव्यक्ति और हास्यबोध ने उन्हें देशभर के दर्शकों का पसंदीदा कलाकार बना दिया।
लोकगायन के क्षेत्र में गोविंदराम निषाद ने अपनी परंपरागत, मिट्टी से जुड़ी आवाज़ के माध्यम से छत्तीसगढ़ी गीतों को राष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाया। उनके गीतों में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, भावनाएँ और जीवन की झलक मिलती है। देश भर के सांस्कृतिक समारोहों में उनकी प्रस्तुति को बड़े सम्मान के साथ सुना और सराहा गया है।
छत्तीसगढ़ी नृत्य को राष्ट्रीय स्तर के रियलिटी शोज़ में पहचान दिलाने वाले मोर मुकुटधारी समूह और भक्ति सहित विभिन्न विधाओं में अपनी गायकी से जगह बनाने वाली हेमलता, साथ ही आदिवासी कला और नृत्य की अनूठी प्रस्तुति के माध्यम से पहचान बनाने वाले अनु असुर भी आज उन कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को पूरे देश में पहुँचाया है। इन सभी कलाकारों के योगदान ने छत्तीसगढ़ की कला को सम्मान और नई पहचान दिलाई है।
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