‘क्या रोमांस सिर्फ स्विट्जरलैंड में ही हो सकता है?’ कमल हासन ने बॉलीवुड की फिजूलखर्ची पर उठाए सवाल, बोले — देश में शूट करो… CG सिनेमा से सीखो सादगी
कमल हासन ने बॉलीवुड की विदेशी शूटिंग और फिजूलखर्ची पर सवाल उठाए। उन्होंने भारतीय फिल्मों से देश में शूटिंग और खर्च कम करने की अपील की, जबकि छत्तीसगढ़ी सिनेमा को मितव्ययी मॉडल बताया जा रहा है।
दिग्गज अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की बढ़ती फिजूलखर्ची पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हर लव स्टोरी को पेरिस और हर हनीमून को स्विट्जरलैंड में ही क्यों दिखाया जाता है?
कमल हासन ने फिल्म इंडस्ट्री से विदेशी शूट, लग्जरी खर्च और अनावश्यक बजट कम करने की अपील की। खास बात यह है कि जिस सादगी और कम बजट मॉडल की बात उन्होंने कही, उसी रास्ते पर लंबे समय से छत्तीसगढ़ी सिनेमा काम करता आया है।
🎬 कम बजट… लेकिन दिल से बनती हैं CG फिल्में
जहां बड़े बॉलीवुड प्रोजेक्ट करोड़ों रुपये सिर्फ विदेशी लोकेशन और लग्जरी पर खर्च कर देते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री सीमित संसाधनों में भी दर्शकों से जुड़ी कहानियां पेश करती है।
CG फिल्मों की खासियत यही रही है कि वे देश का पैसा विदेशों में खर्च करने के बजाय स्थानीय कलाकारों, लोकेशनों और तकनीशियनों को अवसर देती हैं।
👉 यही वजह है कि कमल हासन के बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग CG सिनेमा की सादगी की तारीफ कर रहे हैं।
🌍 ‘हर रोमांस पेरिस में ही क्यों?’ — कमल हासन
कमल हासन ने अपने विस्तृत बयान में कहा कि वैश्विक आर्थिक संकट, ईंधन महंगाई और बढ़ते प्रोडक्शन खर्च के दौर में फिल्म इंडस्ट्री को अनुशासन अपनाना चाहिए।
उन्होंने पूछा:
“क्या रोमांस सिर्फ स्विट्जरलैंड में ही हो सकता है?”
उनका मानना है कि भारतीय फिल्मों को अपने देश और स्थानीय लोकेशनों पर ज्यादा भरोसा करना चाहिए। यही मॉडल वर्षों से CG फिल्म इंडस्ट्री अपनाती रही है, जहां गांव, खेत, लोकसंस्कृति और प्राकृतिक लोकेशन ही फिल्मों की पहचान बनते हैं।
🎥 CG सिनेमा: कम खर्च, ज्यादा कनेक्शन
छत्तीसगढ़ी फिल्मों का बजट बॉलीवुड की तुलना में बेहद छोटा होता है, लेकिन दर्शकों से उनका भावनात्मक जुड़ाव मजबूत रहता है।
- लोकल शूटिंग
- सीमित संसाधन
- लोक कलाकारों को मौका
- कम तकनीकी खर्च
इन वजहों से CG इंडस्ट्री को “मितव्ययी सिनेमा मॉडल” कहा जाता है।
👉 यहां फिल्मों का पैसा विदेशी टूर पर नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार और संस्कृति पर खर्च होता है।
💰 मजदूरों और तकनीशियनों पर बोझ नहीं डालने की अपील
कमल हासन ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में किसी भी आर्थिक सुधार का बोझ वर्कर्स, दिहाड़ी मजदूरों और तकनीशियनों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
CG सिनेमा में भी अक्सर कम बजट के बावजूद पूरी टीम साथ मिलकर काम करती है और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होता है। यही कारण है कि क्षेत्रीय सिनेमा को ज्यादा टिकाऊ मॉडल माना जा रहा है।
🚩 अब बदल सकता है भारतीय सिनेमा का ट्रेंड?
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में भारतीय सिनेमा धीरे-धीरे “लोकेशन शोऑफ” से हटकर “कंटेंट और लागत नियंत्रण” की ओर बढ़ सकता है।
और इस बदलाव में छत्तीसगढ़ी सिनेमा जैसे क्षेत्रीय उद्योग उदाहरण बन सकते हैं, जिन्होंने कम खर्च में भी अपनी अलग पहचान बनाई है।
👉 कमल हासन का संदेश साफ है:
“सिनेमा को दिखावे से नहीं, कहानी और जिम्मेदारी से मजबूत बनाइए।”
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