“कही देबे सन्देश: छत्तीसगढ़ की पहली फिल्म जिसने समाज की जात-पात की दीवारें तोड़ीं”

छत्तीसगढ़ी सिनेमा की पहली फिल्म कही देबे सन्देश (1965) ने समाज की जात-पात की बेड़ियों पर सवाल उठाए। मनु नायक के निर्देशन में बनी यह ऐतिहासिक फिल्म आज भी समानता और प्रेम का संदेश देती है।

Nov 11, 2025 - 19:12
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“कही देबे सन्देश: छत्तीसगढ़ की पहली फिल्म जिसने समाज की जात-पात की दीवारें तोड़ीं”

छत्तीसगढ़ी सिनेमा की पहली फिल्म “कही देबे सन्देश” (Kahi Debe Sandesh) न केवल राज्य की फिल्म इंडस्ट्री का आरंभिक अध्याय थी, बल्कि समाज और प्रेम पर गहरी टिप्पणी करने वाली एक संवेदनशील फिल्म भी थी।


🕰️ रिलीज़ वर्ष

1965

🎥 निर्देशक

Manu Nayak (मनुनायक) — जिन्होंने इस फिल्म को अपने निर्देशन से ऐतिहासिक बना दिया।

🎭 मुख्य कलाकार

  • Seema Kapoor

  • Awadh Kishore Sinha

  • Nand Kumar Patel

  • अन्य स्थानीय कलाकार


💞 कहानी का सार

फिल्म की कहानी एक ऐसे प्रेमी युगल की है जो जात-पात की दीवारों में बंधे समाज से टकराता है।
लड़का निचले वर्ग से है जबकि लड़की एक उच्च जाति के परिवार की बेटी। दोनों का प्रेम समाज की सीमाओं को चुनौती देता है — और यही संघर्ष कहानी का केंद्र बनता है।

फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे प्यार, समानता और मानवता के संदेश को सामाजिक रूढ़ियाँ कुचल देती हैं, और फिर भी प्रेम का “संदेश” लोगों के दिलों तक पहुँचता है — इसलिए इसका नाम रखा गया “कही देबे सन्देश” (एक संदेश देने वाली फिल्म)


🎶 संगीत और सामाजिक संदेश

  • इस फिल्म का संगीत लोकधुनों पर आधारित था, जिसने दर्शकों के दिलों को छुआ।

  • फिल्म का प्रमुख संदेश था — “प्रेम किसी जाति या धर्म का मोहताज नहीं होता।”

  • यह फिल्म अपने दौर से बहुत आगे की सोच रखती थी, क्योंकि उस समय ऐसी कहानियाँ खुलकर नहीं दिखाई जाती थीं।


🏆 महत्व

  • यह छत्तीसगढ़ी भाषा की पहली फीचर फिल्म मानी जाती है।

  • इसे “सैराट” जैसी सामाजिक प्रेमकहानी की पूर्वज फिल्म कहा जा सकता है — जिसने 1960 के दशक में ही सामाजिक अन्याय पर चोट की थी।

  • इस फिल्म ने आने वाले दशकों में छॉलीवुड के लिए रास्ता बनाया।

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